JNU Elections : लाल के मुकाबले नीला और भगवा
जेएनयू एक जमाने में ‘लाल-गढ़’ के नाम से जाना जाता था, जहां वामपंथी विचारधारा ही हावी रहती थी. लाल से अलग कोई भी रंग (नीला, भगवा आदि) अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा पाने में सफल नहीं हो पाता था. यहां तक कि पूरी डिबेट मार्क्स से शुरू होकर, लेनिन से होते हुए फिदेल कास्त्रो पर जाकर खत्म होती थी.
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