डियर जिंदगी : जब कोई बात बिगड़ जाए…

दोस्‍तों और परिवार की छांव की ओर लौटिए, उनसे दिल का हाल साझा कीजिए. बात कितनी भी क्‍यों न बिगड़ जाए, उसे संभाला जा सकता है. यह बात अपने दिल, दिमाग और दीवार पर साफ-साफ लिख दीजिए.

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