डियर जिंदगी : ‘रंग’ कहां गया, कैसे आएगा…

हम समाज के रूप में हमेशा अपने पड़ोसी के प्रति सजग, उसे साथ लेकर चलने वाले रहे हैं. हम सदियों से अविश्‍वसनीय विविधता के बाद भी एक रसरंगी समाज के रूप में रह रहे हैं.

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